Recent-Post

गुरुवार, 1 दिसंबर 2022



!! दस महाविद्याएँ !!

          श्री देवीभागवत पुराण के अनुसार महाविद्याओं की उत्पत्ति भगवान शिव और उनकी पत्नी सती,
          जो कि पार्वती का पूर्वजन्म थीं, के बीच एक विवाद के कारण हुई। जब शिव और सती का विवाह
          हुआ तो सती के पिता दक्ष प्रजापति दोनों के विवाह से खुश नहीं थे। उन्होंने शिव का अपमान 
           करने के उद्देश्य से एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें उन्होंने सभी देवी-देवताओं को 
         आमन्त्रित किया लेकिन द्वेषवश उन्होंने अपने जामाता भगवान शंकर और अपनी पुत्री सती को 
         निमन्त्रित नहीं किया। सती, पिता के द्वारा आयोजित यज्ञ में जाने की जिद करने लगीं जिसे शिव 
         ने अनसुना कर दिया, इस पर सती ने स्वयं को एक भयानक रूप में परिवर्तित (महाकाली का                            अवतार) कर लिया। जिसे देख भगवान शिव भागने को उद्यत हुए। अपने पति को डरा हुआ 
         जानकर माता सती उन्हें रोकने लगीं तो शिव जिस दिशा में गये उस दिशा में माँ का एक अन्य 
         विग्रह प्रकट होकर उन्हें रोकता है। इस प्रकार दसों दिशाओं में माँ ने वे दस रूप लिए थे वे ही 
          दस महाविद्याएँ कहलाईं। इस प्रकार देवी दस रूपों में विभाजित हो गयीं जिनसे वह शिव के 
          विरोध को हराकर यज्ञ में भाग लेने गयीं। वहाँ पहुँचने के बाद माता सती एवं उनके पिता के
          बीच विवाद हुआ। दक्ष प्रजापति ने शिव की निंदा की और सती ने यज्ञ कुंड में प्राणों की आहुति 
          दे दी।


महाकाली : काली, कालिका या महाकाली हिन्दू धर्म की एक प्रमुख देवी हैं। वे मृत्यु, काल और                                       परिवर्तन की देवी हैं।


तारा (देवी) : हिन्दू धर्म में तारा दस महाविद्याओं में से द्वितीय महाविद्या हैं। 'तारा' का अर्थ है,                                             'तारने वाली' अर्थत् 'पार कराने वाली'। ये पार्वती की स्वरूप हैं।


छिन्नमस्ता :  छिन्नमस्ता या 'छिन्नमस्तिका' या 'प्रचण्ड चण्डिका' दस महाविद्यायों में से एक हैं।                                          छिन्नमस्ता देवी के हाथ में अपना ही कटा हुआ सिर है तथा दूसरे हाथ में खड्क है।


षोडशी  :   षोडशी दस महाविद्याओं (दस देवियों) में से एक हैं। इन्हें 'महात्रिपुरसुन्दरी',  ललिता,                                    लीलावती, लीलामती, ललिताम्बिका, लीलेशी, लीलेश्वरी,त्रिपुरासुन्दरी ललितागौरी तथा                                   राजराजेश्वरी भी कहते हैं। वे दस महाविद्याओं में सबसे प्रमुख देवी हैं।


भुवनेश्वरी : भुवनेश्वरी अर्थात संसार भर के ऐश्वयर् की स्वामिनी आदिशक्ति दुर्गा माता के दस                                          महाविद्याओं का पंचम स्वरूप है जिस रूप में इनहोने त्रिदेवो को दर्शन दिये थे। देवी  भागवत पुराण में इस बात का स्पष्टीकरण मिलता है।


भैरवी :  भैरवी हिंदुओं की एक देवी हैं जो दशमहाविद्याओं में से एक हैं। कुछ ग्रन्थों में वह                                          त्रिमूर्ति से भी श्रेष्ठतर हैं। वें माता पार्वती की अवतार और भगवान शिव के भैरवनाथ अवतार की शक्ति या पत्नी हैं।


धूमावती :  धूमावती धुएं के रूप में सती का भौतिक स्वरूप है। सती का जो कुछ बचा रहा- उदास                                 धुआं।


बगलामुखी : माता बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या हैं। इन्हें माता पीताम्बरा भी                                      कहते हैं। सम्पूर्ण सृष्टि में जो भी तरंग है वो इन्हीं की वजह से है। 


मातंगी : मतंग शिव का नाम है। इनकी शक्ति मातंगी है। यह हरा वर्ण और चन्द्रमा को मस्तक                                   पर धारण करती हैं। यह पूर्णतया वाग्देवी की ही पूर्ति हैं।

कमला : लक्ष्मी  को हिंदू धर्म में दस महाविद्याओं (बुद्धि देवी) में से एक कमला के रूप में भी जाना                           जाता है। कमला लक्ष्मी का एक और नाम है, विष्णु की पत्नी। यह नाम संस्कृत में कमल  शब्द से लिया गया है, जो विष्णु का एक और नाम है



दिसंबर 01, 2022   Posted by Satish Kumar Tripathi in with No comments

0 Comments:

एक टिप्पणी भेजें

Bookmark Us

Delicious Digg Facebook Favorites More Stumbleupon Twitter

Search