तारा (देवी) : हिन्दू धर्म में तारा दस महाविद्याओं में से द्वितीय महाविद्या हैं। 'तारा' का अर्थ है, 'तारने वाली' अर्थत् 'पार कराने वाली'। ये पार्वती की स्वरूप हैं।
छिन्नमस्ता : छिन्नमस्ता या 'छिन्नमस्तिका' या 'प्रचण्ड चण्डिका' दस महाविद्यायों में से एक हैं। छिन्नमस्ता देवी के हाथ में अपना ही कटा हुआ सिर है तथा दूसरे हाथ में खड्क है।
षोडशी : षोडशी दस महाविद्याओं (दस देवियों) में से एक हैं। इन्हें 'महात्रिपुरसुन्दरी', ललिता, लीलावती, लीलामती, ललिताम्बिका, लीलेशी, लीलेश्वरी,त्रिपुरासुन्दरी ललितागौरी तथा राजराजेश्वरी भी कहते हैं। वे दस महाविद्याओं में सबसे प्रमुख देवी हैं।
भुवनेश्वरी : भुवनेश्वरी अर्थात संसार भर के ऐश्वयर् की स्वामिनी आदिशक्ति दुर्गा माता के दस महाविद्याओं का पंचम स्वरूप है जिस रूप में इनहोने त्रिदेवो को दर्शन दिये थे। देवी भागवत पुराण में इस बात का स्पष्टीकरण मिलता है।
भैरवी : भैरवी हिंदुओं की एक देवी हैं जो दशमहाविद्याओं में से एक हैं। कुछ ग्रन्थों में वह त्रिमूर्ति से भी श्रेष्ठतर हैं। वें माता पार्वती की अवतार और भगवान शिव के भैरवनाथ अवतार की शक्ति या पत्नी हैं।
धूमावती : धूमावती धुएं के रूप में सती का भौतिक स्वरूप है। सती का जो कुछ बचा रहा- उदास धुआं।
बगलामुखी : माता बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या हैं। इन्हें माता पीताम्बरा भी कहते हैं। सम्पूर्ण सृष्टि में जो भी तरंग है वो इन्हीं की वजह से है।
कमला : लक्ष्मी को हिंदू धर्म में दस महाविद्याओं (बुद्धि देवी) में से एक कमला के रूप में भी जाना जाता है। कमला लक्ष्मी का एक और नाम है, विष्णु की पत्नी। यह नाम संस्कृत में कमल शब्द से लिया गया है, जो विष्णु का एक और नाम है








0 Comments:
एक टिप्पणी भेजें