Recent-Post

रविवार, 4 दिसंबर 2022

!! गायत्री माता का चालीसा !!

दोहा

हीं श्रीं, क्लीं, मेधा, प्रभा, जीवन ज्योति प्रचण्ड |

शांति, क्रांति, जागृति, प्रगति, रचना शक्ति अखण्ड || (१)

जगत जननि, मंगल करनि, गायत्री सुखधाम |

प्रणवों सावित्री, स्वधा, स्वाहा पूरन काम || (२)


II चोपाई II

भूर्भुवः स्वः ॐ युत जननी, गायत्री नित कलिमल दहनी || (१)

 अक्षर चौबिस परम पुनीता, इनमें बसें शास्त्र, श्रुति, गीता || (२)

 शाश्वत सतोगुणी सतरुपा, सत्य सनातन सुधा अनूपा  || (३)

 हंसारुढ़ सितम्बर धारी, स्वर्णकांति शुचि गगन बिहारी || (४)

 पुस्तक पुष्प कमंडलु माला, शुभ्र वर्ण तनु नयन विशाला || (५)

 ध्यान धरत पुलकित हिय होई , सुख उपजत, दुःख दुरमति खोई  || (६)

 कामधेनु तुम सुर तरु छाया , निराकार की अदभुत माया ||(७)

 तुम्हरी शरण गहै जो कोई , तरै सकल संकट सों सोई || (८)

 सरस्वती लक्ष्मी तुम काली , दिपै तुम्हारी ज्योति निराली || (९)

 तुम्हरी महिमा पारन पावें , जो शारद शत मुख गुण गावें || (१०)

 चार वेद की मातु पुनीता , तुम ब्रहमाणी गौरी सीता || (११)

 महामंत्र जितने जग माहीं , कोऊ गायत्री सम नाहीं ||(१२)

 सुमिरत हिय में ज्ञान प्रकासै , आलस पाप अविघा नासै || (१३)

 सृष्टि बीज जग जननि भवानी , काल रात्रि वरदा कल्यानी || १४)

 ब्रहमा विष्णु रुद्र सुर जेते, तुम सों पावें सुरता तेते || (१५)

 तुम भक्तन की भक्त तुम्हारे , जननिहिं पुत्र प्राण ते प्यारे || (१६)

 महिमा अपरम्पार तुम्हारी, जै जै जै त्रिपदा भय हारी || (१७)

 पूरित सकल ज्ञान विज्ञाना ,तुम सम अधिक न जग में आना || (१८)

 तुमहिं जानि कछु रहै न शेषा , तुमहिं पाय कछु रहै न क्लेषा || (१९)

 जानत तुमहिं, तुमहिं है जाई ,पारस परसि कुधातु सुहाई || (२०)

 तुम्हरी शक्ति दिपै सब ठाई . माता तुम सब ठौर समाई || (२१)

 ग्रह नक्षत्र ब्रहमाण्ड घनेरे , सब गतिवान तुम्हारे प्रेरे ||(२२)

 सकलसृष्टि की प्राण विधाता , पालक पोषक नाशक त्राता || (२३)

 मातेश्वरी दया व्रत धारी , तुम सन तरे पतकी भारी ||(२४)

 जापर कृपा तुम्हारी होई , तापर कृपा करें सब कोई || (२५)

 मंद बुद्घि ते बुधि बल पावें , रोगी रोग रहित है जावें || (२६)

 दारिद मिटै कटै सब पीरा , नाशै दुःख हरै भव भीरा || (२७)

 गृह कलेश चित चिंता भारी , नासै गायत्री भय हारी || (२८)

 संतिति हीन सुसंतति पावें , सुख संपत्ति युत मोद मनावें || (२९)

 भूत पिशाच सबै भय खावें , यम के दूत निकट नहिं आवें || (३०)

 जो सधवा सुमिरें चित लाई , अछत सुहाग सदा सुखदाई || (३१)

 घर वर सुख प्रद लहैं कुमारी ,विधवा रहें सत्य व्रत धारी || (३२)

 जयति जयति जगदम्ब भवानी , तुम सम और दयालु न दानी || (३३)

 जो सदगुरु सों दीक्षा पावें , सो साधन को सफल बनावें || (३४)

सुमिरन करें सुरुचि बड़भागी , लहैं मनोरथ गृही विरागी || (३५)

 अष्ट सिद्घि नवनिधि की दाता , सब समर्थ गायत्री माता || (३६)

 ऋषि, मुनि, यती, तपस्वी, जोगी , आरत, अर्थी, चिंतित, भोगी || (३७)

 जो जो शरण तुम्हारी आवें , सो सो मन वांछित फल पावें II (३८)

 बल, बुद्घि, विघा, शील स्वभाऊ , धन वैभव यश तेज उछाऊ II (३९)

 सकल बढ़ें उपजे सुख नाना, जो यह पाठ करै धरि ध्याना II (४०)

 दोहा

यह चालीसा भक्तियुत, पाठ करे जो कोय ।

तापर कृपा प्रसन्नता, गायत्री की होय ॥ (१)

 

॥ श्री गायत्री माता का चालीसा सम्पूर्ण





दिसंबर 04, 2022   Posted by Satish Kumar Tripathi in , with No comments

0 Comments:

एक टिप्पणी भेजें

Bookmark Us

Delicious Digg Facebook Favorites More Stumbleupon Twitter

Search